
अब समय बदल गया है। रेडीमेड जमाना आ गया है। टेंट और वेटरों की प्रथा ने सब कुछ बदल दिया है। आज की शादियां सिर्फ तीन दिन का खेल बन गई हैं, जहां न कोई जिम्मेदारी का अहसास है न सामाजिकता का भाव।
याद आती है वो गांव की शादियां और त्योहार, जो दिल को छू जाते थे।वंदना ठाकुर दुआरा लिखीगई एक सच्ची कहानी।








