प्रदेश में निजी भूमि पर शंकु प्रजाति के पेड़ों के कटान की अनुमति दे सरकार हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम श्रमिक आपूर्ति मेट संघ ने रखी मांग कहा कटान से सरकार के राजस्व में भी होगी बढ़ोतरी

प्रदेश में निजी भूमि पर शंकु प्रजाति के पेड़ों के कटान की अनुमति दे सरकार
हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम श्रमिक आपूर्ति मेट संघ ने रखी मांग
कहा कटान से सरकार के राजस्व में भी होगी बढ़ोतरी

हिमाचल प्रदेश में सरकार के द्वारा बीते साल दिसंबर माह से निजी भूमि पर हरे पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि सरकार ने खैर वृक्षों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है और उनकी कटाई को 10 वर्षीय फेलिंग कार्यक्रम के अंतर्गत नियंत्रित किया जा रहा है। लेकिन अन्य शंकू प्रजातियों के पेड़ जैसे देवदार, चील, कैल और फर आदि के संबंध में कोई स्पष्ट दिशा -निर्देश जारी नहीं किये गए हैं। ऐसे में हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम श्रमिक आपूर्ति मेट संघ सरकार से मांग करता है कि इस पर लगाई गई रोक को हत्या जाए। हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम श्रमिक आपूर्ति मेट संघ के नवनियुक्त अध्यक्ष अनिल सूद सरकार से इस बात की मांग रखी हैं। अनिल सूद ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में इन प्रजातियों की कटाई निजी भूमि पर अधिकतम 33 प्रतिशत तक अनुमत है और यह कार्य राज्य वन विकास निगम के माध्यम से किया जाता है। अनिल सूद ने कहा कि वृक्ष मालिकों / किसानों को इन वृक्षों के विक्रय पर वन निगम द्वारा करोड़ो रूपयों का भुगतान किया जाता है। इस कार्य से चरान व ढुलाई मजदूरों, ट्रकों व ट्रेक्टर मालिकों को वन निगम के सेल डिपुओं तक माल पहुंचाने से रोजगार मिलता है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त निगम कुल मूल्य का 18 प्रतिशत जीएसटी केन्द्र / राज्य सरकार को और 15 प्रतिशत ओवर हेड शुल्क राज्य सरकार को राजस्व के रूप में मिलता है। प्रदेश अध्यक्ष अनिल सूद ने कहा कि प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों अनुसार वृक्ष मालिक का 100 वृक्ष 33 प्रतिशत के हिसाब से 30 वर्ष में ही कटेगा और इन 30 वर्षों में उस भूमि पर कई नए वृक्ष तैयार हो जाते हैं। क्योंकि सरकार के निर्देशानुसार निजी भूमि में एक वृक्ष काटने व 3 नए पौधे लगाए जाते हैं। लेकिन अब इन वृक्षों की कटाई पर रोक लगा दी गई है और अभी तक कोई स्पष्ट नीति उपलब्ध नहीं है। प्रदेश के किसान वर्षों से अपनी वृक्षों की मार्किंग एवं कटाई की प्रतीक्षा कर रहे थे। जिससे उन्हें आय का साधन मिल सके। साथ ही फील्ड में कार्यरत अधिकारियों भी इस बारे दिशा-निर्देशों के अभाव में निर्णय लेने में असमर्थ हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार से आग्रह है कि खैर वृक्षों की तरह ही शंकू प्रजाति के वुक्षों को काटने की अनुमति दी जाए। इसके अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक को निर्देशित कर स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए जाए। ताकि प्रदेश में किसानों और वन ठेकेदारों की समस्या का समाधान हो सके।
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वही, अध्यक्ष अनिल सूद ने
हिमाचल प्रदेश स्टेट फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन (एचपीएसएफडीसी) में निविदा (टेंडर) की नई शर्तों संशोधन की भी मांग रखी हैं। अध्यक्ष अनिल सूद ने बताया कि इस बारे उन्होंने प्रबंध निदेशक (एमडी) के साथ-साथ वन निगम के उपाध्यक्ष (कैबिनेट रैंक) केहर सिंह खाची और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (बॉड) सदस्य कृष्ण कुमार और अनिल ठाकुर से मुलाकात की थी। अनिल सूद ने बताया कि यह बैठक निगम के नए नियमों के कारण पैदा हुए तनाव को कम करने के उ‌द्देश्य से की गई थी। अनिल सूद ने कहा कि इस बैठक में निविदा की नई शर्तें को रद्द कर पुरानी, व्यवहारिक शर्तों को बहाल करने की मांग रखी गई और एक्सटेंशन फीस को समाप्त या कम करने की मांग की गई। उन्होंने बताया कि निविदा में सिक्योरिटी ईएमडी की शर्तों में नरमी लाने और पंजीकरण शुल्क में अनुचित वृद्धि को वापस लेने की मांग की गई। उनका कहना है कि निविदा में ये नई शर्तें ठेकेदारों और लेबर सप्लाई मेट्स (एलएसएम) पर अत्यधिक आर्थिक दबाव डाल रही हैं। अनिल सूद ने कहा कि शीर्ष अधिकारियों से बातचीत के बाद भी समाधान न निकलने पर यूनियन ने अपना कड़ा रुख दोहराया है। यूनियन ने स्पष्ट तौर पर घोषणा की है कि जब तक ये नई विवादित शर्तें (जिनमें एक्सटेंशन फीस, ईएमडी, और बढ़ाया गया पंजीकरण शुल्क शामिल है) हटाई नहीं जातीं। तब तक हमसे जुड़े कोई भी ठेकेदार या एलएसएम निगम के टेंडर नहीं भरेंगे और हम सभी आने वाले टेंडरों का बहिष्कार जारी रखेंगे। अनिल सूद ने कहा कि वन निगम के कार्यों में लगे ठेकेदारों और हजारों श्रमिकों का यह बहिष्कार निगम के लिए एक बड़ी प्रशासनिक और कार्यात्मक चुनौती बन सकता है। ऐसे में अब निगम के उच्च प्रबंधन को जल्द ही कोई समाधान निकालना होगा।
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गौर रहे कि जिला कुल्लू के भुंतर के रहने वाले अनिल सूद 30 अक्टूबर को ही हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम श्रमिक आपूर्ति मेट संघ के अध्यक्ष पद पर तैनात हुए हैं और पद संभालने के बाद से ही वो प्रदेश में वन निगम के ठेकेदारों की मांग को सरकार के समक्ष उठा रहे हैं। अनिल सूद वर्तमान में जिला कुल्लू सहकार संघ के भी अध्यक्ष नियुक्त हुए हैं और सहकार सभाओं को आगे ले जाने की दिशा में भी उनके द्वारा नए प्रयास किए जा रहे हैं। अनिल सूद इससे पहले नगर पंचायत भुंतर में भी पार्षद के तौर पर अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं और नगर पंचायत भुंतर के कई विकास कार्य को पूरा करने में भी उनका अहम योगदान रहा है। अनिल सूद कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में भी कई सालों से काम कर रहे हैं और कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में भी अनिल सूद अपने परिवार के साथ लगातार जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे है।

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